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हर बुखार के पीछे होता है सीटक कारण
आल अबाउट फीवर पर वर्कशॉप आयोजित
इंदौर. बुखार के कई प्रकार होते है और हर प्रकार के बुखार के पीछे एक सटीक कारण होता है. बुखार को पहचानना और उसके अनुरूप दवाओं को चयन करना बेहद जरुरी है कई बार मरीज सामान्य वायरल फीवर में एंटी बोइटिक दवाओं का सेवन कर के प्रतिरोधक क्षमताओं में कमी ला देते है। बच्चों के बुखार का इलाज सही तरीके से नहीं किया जाये तो यह घातक रूप ले लेता है.
बुखार से सम्बंधित कई ऐसी जानकारीया इंदौर अकादमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स द्वारा आयोजित आल अबाउट फीवर वर्कशॉप में मुंबई से आये शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ महेश मोहिते ने बताई। डॉ मोहिते के साथी वर्कशॉप में अमदाबाद से डॉ अभय शाह, बड़ोदा से डॉ सतीश पांडिया भी शामिल हुए साथ ही वर्कशॉप में हिस्सा लेने के लिए शहर और आस पास से 100 डॉक्टरों ने हिस्सा लिया.
डॉ शाह ने बताया जैसे जैसे इलाज सटीक होते जा रहे है वैसे वैसे बीमारियाँ भी अपना रूप बदल रही है ऐसे में कार्यशाला में बीमारियाँ व उनके इलाज़ को एक दुसरे से साझा करने में मददगार है। डॉ पांडिया ने बताया कार्यशाला में मिली व्यवहारिक जानकारी का उपयोग कर के विशेषज्ञ समय पर बीमारी का इलाज़ कर सकते है जिसके निश्चित ही अच्छे परिणाम सामने आयेंगे और रिकवरी भी जल्दी होगी।
डॉ के के अरोरा ने बताया बुखार के कारण को समय पर पकड़ लिया जाये तो बेहतर परिणाम के साथ बीमारी पर खर्च भी कम हो जाता है और बच्चों की मृत्युदर में भी कमी लाई जा सकती है।
घातक है मानसून में होने वाली बीमारियाँ
डॉ संजीव सिंह रावत ने बताया मानसून में होने वाली कुछ बीमारियाँ जैसे डेंगू, लेप्टोस्पैरोसिस, ब्रुसेलोसिस, रिकेटशिया, वायरल इन्फेक्शन कई बार घातक रूप ले लेती है जोड़ो के सुजन के साथ होने वाला बुखार, शरीर पर अलग अलग दानों के साथ होने वाला बुखार, तंत्रिका तंत्र और दिमाग की बामारियों से होने वाला बुखार, ऑटोइमियोन बिमारियों एवं विभिन्न संक्रमण से होने वाला बुखार व कुछ दुर्लभ बिमारियों के बारे में वर्कशॉप में विस्तृत जानकारी दी।
संस्था की सचिव डॉ श्रीलेखा जोशी ने बताया अकादमी द्वारा ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन देश भर में किया जा रहा है जिससे बच्चों में होने वाला बुखार के कारणों और लक्षणों को समझ कर जल्दी इलाज़ किया जा सके.
चित्र- फीवर वर्कशॉप.


